राज़ी की सफलता के बाद, मेघना गुलज़ार फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ पर अपनी अगली फिल्म लेकर आ रही हैं। यह एक बायोपिक फिल्म है, जो सैम मानेकशॉ की ज़िंदगी पर आधारित होगी। खास बात है कि सैम मानेकशॉ, फील्ड मार्शल के पद पर प्रमोट किए जाने वाले पहले भारतीय सेना अधिकारी थे। वह 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय सेना के सेनाअध्यक्ष थे।

फिल्म के लिए रिसर्च

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1971 मे भारत- पाक यूद्ध में भारत को विजय मिली और इसी युद्ध के बाद ही बांग्लादेश का जन्म हुआ

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मेघना गुलज़ार की हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म ‘राज़ी’ को काफी प्रशंसा मिल रही है। जहां उनकी इस फिल्म के लिए भारत- पाकिस्तान को चुना गया वहीं उनकी अगली फिल्म भी 1971 भारत- पाकिस्तान युद्ध परिस्थितियों पर ही आधारित होगी। मेघना अपनी आने वाली इस फिल्म के लिए रिसर्च कर रहीं हैं। इस फिल्म के लिए वह सेम मार्शल के बेटी और पोती से मुलाकात करेंगी। जहां फिल्म की कहानी अगले 3 महीनों में बनकर तैयार होगी, वहीं फिल्म के शूट को शुरु होने में 6 महीने का वक्त लगेगा। मेघना बताती है, “2015 में रोनी स्क्रूवाला (निर्माता) ने मुझे संपर्क किया था, लेकिन उस दौरान हमारे पास कोई कहानी नहीं थी। तभी बातचीत के दौरान सेम मानेकशॉ के बारे में विचार आया और हमें पता चल गया कि आखिर मेरी अगली फिल्म क्या होगी।”

रोनी स्क्रूवाला होंगे प्रोड्यूसर

फिल्म की शूटिंग अगले साल या फिर इस साल के अंत में शुरू की जाएगी। खास बात यह है कि सैम मानेकशॉ की ज़िंदगी अपने आप में बहुत से लोगों के लिए रोल मॉडल है। वह चार दशक के अपने सैन्य करियर में 5 युद्धों का हिस्सा थे। फिल्म का निर्माण कर रहे रोनी स्क्रूवाला कहते हैं, “इस फिल्म को ज़बरदस्त तैयारी की आवश्यकता है। जब सैम मानेकशॉ की बात आती है, तो वह ऐसी कहानी है, जिसे बताया जाना चाहिए। वह भारत के पहले और एकमात्र मार्शल होने के नाते पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में सबसे आगे थे। यह प्रेरणादायक कहानी है। खास बात यह है कि मेघना फिल्म राज़ी के बाद ऐसी ही फिल्म करना चाहती थी।”

खास बात है कि फिल्म के लिए 1971 के भारत-पाकिस्तान बॉर्डर को फिर से ही क्रिएट किया जाएगा। हालांकि मेघना मानती है कि यह काम उनके लिए शायद इतना मुश्किल ना हो क्योंकि फिल्म राज़ी के लिए भी उन्होंने 1970 के दशक के पाकिस्तान को स्थापित किया था

आखिर क्यों सैम मानेकशॉ को चुना गया

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उन्होनें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को ‘मैडम’ कहने से इंकार कर दिया था, मानेकशॉ वे कहा कि नह उन्हें प्रधानमंत्री ही कहेंगे

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सैम मानेकशॉ एक काफी बहादुर इंसान थे। वह एक पक्के आर्मी वाले थे। उनके बारे में कहा जाता है कि उनको मौत से डर नहीं लगता था। वह कभी झूठ नहीं बोलते थे, साथ ही उन्हें मज़ाक करना और दिल खोल कर साफ साफ अपनी बात रखना काफी पसंद था। वह बेबाक थे, चर्चित है कि वह तत्कालीन प्रधानमंत्री को स्वीटी कह कर बुलाते थे। लड़ाई के दौरान मैदान में 7 गोलियां लगने के बाद जब जनरल मानेकशॉ को मिलिट्री अस्पताल पहुंचाया गया तब मानेकशॉ दर्द में होने के बावजूद डॉक्टर से बोले “अरे कुछ नहीं, एक गधे ने लात मार दी” उनकी यह बात ज़ाहिर करती है कि फील्ड मार्शल मानेकशॉ एकदम हाज़िरजवाब और प्रभावशाली आदमी थे।

हांलाकि देखना होगा कि मेघना अपनी इस फिल्म के दमदार रोल में आखिर किस बॉलीवुड हीरो चांस देती हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।