संगीत के बेताज बादशाह ए आर रहमान एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके सुरों से बॉलीवुड कि सुबह होती है और शाम ढलती है। ए आर रहमान का दिया हुआ संगीत लोगों पर एक ऐसा असर छोड़ता है, जो कभी नहीं उतरता। दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित ऑस्कर अवार्ड को जीत चुके और भारतीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला चुके ए आर रहमान, आज ना सिर्फ देश में बल्कि दुनिया के कोने-कोने में जाने जाते हैं। ऐसी उपलब्धि पाने के लिए ए आर रहमान ने कड़ी मेहनत की है और जिंदगी के कई थपेड़े भी झेले हैं।

ऐसे बदला था रहमान का नाम

दरअसल रहमान सिर्फ 9 साल के थे जब उनके पिताजी की मौत हो गई। इसकी वजह से वह स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर पाए। पिता की मौत के बाद कट्टरपंथियों ने उन्हें परेशान करना शुरू किया, जिसकी वजह से वह बेहद उदास रहने लगे थे। 6 जनवरी 1967 में तमिलनाडु में जन्मे रहमान का असली नाम दिलीप कुमार था।कहा जाता है कि 1989 में रहमान की छोटी बहन किसी बीमारी की चपेट में आ गई। डॉक्टरों ने उनके बचने की उम्मीद छोड़ दी थी, इस बात से परेशान होकर रहमान ने ख़ुदा का रास्ता अपनाया और मस्जिदों में जाकर दुआएं मांगी। उनकी दुआ रंग लाई और उनकी बहन चमत्कारिक रूप से ठीक हो गई। इस अजूबे को देखकर रहमान ख़ुदा की राह पर चल पड़े और उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया।

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रहमान का नाम उनकी मां की मर्ज़ी से रखा गया था

वहीं दूसरी ओर रहमान की बायोग्राफी ‘द स्पिरिट ऑफ म्यूज़िक’ में लिखी गई कहानी के अनुसार एक ज्योतिष के कहने पर रहमान ने अपना नाम बदला था। रहमान ने अपने एक इंटरव्यू में भी कहा था कि ‘मुझे अपना नाम अच्छा नहीं लगता था। एक दिन मेरी मां और बहन एक ज्योतिष के पास मेरी कुंडली दिखाने गई और तब से ही मेरा नाम दिलीप कुमार से ए आर रहमान पड़ गया।’ रहमान की मां चाहती थी कि उनके नाम के आगे अल्लाह रक्खा भी जोड़ा जाए, यही वजह है कि आखिर में उनका नाम ए आर रहमान पड़ा।

रहमान पर हो चुकी है अवार्ड्स की बारिश

रहमान ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश मान बढ़ाया है।

ऑस्कर अवार्ड हो, राष्ट्रीय पुरस्कार हो या फिल्म फेयर अवार्ड, ए आर रहमान ने हर अवार्ड पर अपना नाम उकेरा है। ए आर रहमान एक ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने 10 फिल्म फेयर अवार्ड जीते हैं और उन्हें 15 बार फिल्मफेयर के लिए नॉमिनेट किया गया है। रहमान को फिल्म स्लमडॉग मिलेनियर के लिए दो ऑस्कर अवार्ड से नवाज़ा गया था। वह दो ग्रैमी अवार्ड जीतने वाले पहले भारतीय संगीतकार हैं। इसके अलावा रहमान ने एक बाफ्टा अवार्ड, एक गोल्डन ग्लोब अवार्ड, 4 नेशनल फिल्म अवार्ड और 13 फिल्म फेयर साउथ के अवॉर्ड भी अपने नाम किये हैं।

संगीत की दुनिया के बेताज बादशाह

बॉलीवुड के सरताज माने जाने वाले लेखक गुलज़ार ने भी ए आर रहमान के साथ कई फिल्मों में काम किया है। गुलजार की माने तो “रहमान हिंदी सिनेमा में मील के पत्थर के तौर पर उभरे हैं।उन्होंने फिल्मों में संगीत की शक्ल ही बदल दी। कई सालों से चले आ रहे हैं ‘अंतरा-मुखड़ा’ के ट्रेंड को उन्होंने बदल दिया।”

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वे दो अलग-अलग गानों से मिलती-जुलती धुन बनाते थे, जिसे सुनने पर एक नई धुन लोगों को सुनाई देती थी। भले ही उनके गानों में शब्दों का अर्थ समझने में देर लगे, लेकिन फिर भी उनका संगीत दिल तक ज़रूर पहुंचता है।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..